कई-कई बार सोचा कि चली जाउंगी यहां से. लेकिन नहीं गई. कहां जाती. अब तो कहीं जा भी नहीं सकती.”
लगभग साठ साल की किटी मेम साहब जब बातें करती हैं तो लगता है जैसे उनके जीवन की सारी इच्छाएं अधूरी रह गईं. सारे सपने...सारी आकांक्षाएं... लेकिन इन सबसे कहीं बड़ा है इनका अधूरापन !
सिवाय इसके कि वे मैक्लुस्कीगंज में ही रहें.
मैक्लुस्कीगंज यानी दुनिया में एंग्लो इंडियन समुदाय की पहली बस्ती.
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